Tuesday, October 9, 2012
जिज्ञासा(JIGYASA) : सचिन तेंदुलकर का सुझाव है कि भारत में खेलों को बढ़...
जिज्ञासा(JIGYASA) : सचिन तेंदुलकर का सुझाव है कि भारत में खेलों को बढ़...: सचिन तेंदुलकर ने राज्य सभा सांसद की हैसियत से भारतीय खेलों पर एक दृष्टिपत्र तैयार किया है और इसे मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल व खेल ...
Friday, September 21, 2012
facts and opinion.....: The main objective of the Multilateral Fund
facts and opinion.....: The main objective of the Multilateral Fund: The main objective of the Multilateral Fund for the Implementation of the Montreal Protocol is to assist developing country parties to the M...
Sunday, September 9, 2012
जिज्ञासा(JIGYASA) : 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक दूध की मांग करीब ...
जिज्ञासा(JIGYASA) : 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक दूध की मांग करीब ...: वर्ष 2010-11 के दौरान दुग्ध उत्पादन 121.8 मिलियन टन रहा। 2010-11 में प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता 269 ग्राम प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गय...
Friday, September 7, 2012
जिज्ञासा(JIGYASA) : 'सुधारक' को गोखले ने अपनी लड़ाई का माध्यम बनाया.
जिज्ञासा(JIGYASA) : 'सुधारक' को गोखले ने अपनी लड़ाई का माध्यम बनाया.: 'सुधारक' को गोखले ने अपनी लड़ाई का माध्यम बनाया. 'सर्वेन्ट ऑफ़ सोसायटी' की स्थापना गोखले द्वारा किया गया महत्त्वपूर्ण कार्य था. उनका मानना थ...
जिज्ञासा(JIGYASA) : सुभद्रा कुमारी चौहान की पहली कविता प्रयाग से निकल...
जिज्ञासा(JIGYASA) : सुभद्रा कुमारी चौहान की पहली कविता प्रयाग से निकल...: 1913 में नौ वर्ष की आयु में सुभद्रा कुमारी चौहान की पहली कविता प्रयाग से निकलने वाली पत्रिका 'मर्यादा' में प्रकाशित हुई थी। यह कविता ‘नीम...
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Saturday, July 14, 2012
Monday, April 30, 2012
SCIENCE AND TECHNOLOGY: नैनो प्रौद्योगिकी
SCIENCE AND TECHNOLOGY: नैनो प्रौद्योगिकी: नैनो प्रौद्योगिकी ज्ञान का भंडार है और ऐसी प्रौद्योगिकी है, जो विभिन्न प्रकार के उत्पादों और प्रक्रियाओं को प्रभावित करेगी। इसके राष्ट्री...
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Saturday, October 22, 2011
क्रांति !
निचले पैदान पर जी रहे लोगो को जोड़ कर ही कोई आन्दोलन या क्रांति हो सकती है .उनको समय रहते ही संगठित करना होगा .भारत में रक्तरंजित क्रांति नहीं बल्कि रक्तहीन क्रांति की जरुरत है . किसी भी लोकतान्त्रिक देश में यही क्रांति का सर्वोत्तम रूप हो सकता है .देश एक नए दौर में पहुँच रहा है जहाँ पर उत्साही नौजवानों की जरुरत है ,वे ही क्रांति का नेतृत्व कर सकते है .सभी वर्गों में समन्वय होना इसकी पहली शर्त है ,दुःख की बात है की हमारे देश में इसी चीज की सबसे बड़ी कमी है .जबतक सभी वर्ग के लोगो में समन्वयन नहीं हो जाता तबतक पूर्ण क्रांति की बात करना बेमानी होगी ...यहीं अंतिम सत्य है .
आज के ज्यादातर नौजवानों को क्रांति का अनुभव नहीं है .अनुभव लेना पड़ेगा ...केवल दिवास्वप्न देखने भर से गरीबों और मजदूरों को न्याय नहीं मिलेगा और न ही क्रांति होगी ....
तो फिर !....क्रांति का पाठ्यक्रम तैयार करो और उसे धरातल पर उतार दो .
आज हमारे साहित्यकारों ,कवियों ,पत्रकारों की कलम चुक गयी है ,पैसे की आहट सुन कर ही लिखती है ...क्रांति के लिए तो उसमे जंग लग गया है .....तो फिर क्रांति कैसे होगी ?
Sunday, October 9, 2011
मोबाइल फोन ने निम्न वर्ग को सशक्त बनाया है...
मोबाइल फोन ने निम्न वर्ग को सशक्त बनाया है.मछुआरे, किसान और सब्जी बेचने वाले अपने उत्पाद के मोलभाव के लिए मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं...
Friday, September 30, 2011
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